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एक संगत व पंगत से अपनत्व बढ़ता है

एक संगत व पंगत से अपनत्व बढ़ता हैशुभांजलि ग्रुप की बहनों ने शौर्य की प्रतीक ‘खड्ग नृत्य’ की प्रस्तुति दी

चित्तौड़गढ़। विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल एवं मातृशक्ति दुर्गावाहिनी (चित्तौड़गढ़ विभाग) के तत्वाधान में रविवार को इंदिरा प्रियदर्शिनी ऑडिटोरियम में ‘समरसता संगोष्ठी: संगत और पंगत’ अत्यंत उत्साह के साथ संपन्न हुआ।

मुख्य वक्ता विहिप के केंद्रीय सह संगठन मंत्री विनायक राव देशपांडे ने सामाजिक समरसता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि जाति, वर्ण और आर्थिक असमानता की बेड़ियों को तोड़कर ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। सदियों पहले ऐसे जातिगत भेदभाव नहीं थे। यह सब तो हमारी संस्कृति को नष्ट करने के षड्यंत्र के चलते आक्रामकों द्वारा किया गया। हम सब देश में समरस होकर रहते थे। उसका जीता जागता उदाहरण हमारे यहाँ आयोजित होने वाले कुम्भ मेले हैं, जहाँ बिना किसी जातिगत भेदभाव के एक घाट पर हर कोई स्नान कर सकता है। उन्होंने आह्वान किया कि छुआछूत और ऊंच-नीच की भावना को जड़ से समाप्त कर हमें ‘हिन्दू हम सब भाई-भाई’ के भाव को आत्मसात करना चाहिए।

संगत और पंगत के महत्व को समझाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जब हम साथ बैठते हैं (संगत) और साथ भोजन करते हैं (पंगत), तब हृदय की दूरियां मिटती हैं और अपनत्व बढ़ता है। सेवा ही धर्म के ध्येय को आत्मसात करते हुए समाज के वंचित और पिछड़े वर्ग को गले लगाना ही सच्ची ईश्वर सेवा है।

उन्होंने सांस्कृतिक एकता पर कहा कि हमारी जड़ें एक हैं, हमारे पूर्वज एक हैं, इसलिए समाज में किसी भी आधार पर विभाजन स्वीकार्य नहीं है।

एक संगत व पंगत से अपनत्व बढ़ता हैकार्यक्रम में संत विनोद जी यति महाराज जी ने आशीर्वचन में कहा कि धर्म वही है जो जोड़ना सिखाता है, तोड़ना नहीं।

कार्यक्रम में चित्तौड़गढ़, निम्बाहेड़ा और प्रतापगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में लोग सम्मिलित हुए। पूरा ऑडिटोरियम ‘भारत माता की जय’, ‘जय जय श्री राम’ और ‘जयकारे वीर बजरंगी’ के गगनभेदी नारों से गुंजायमान रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। इसके पश्चात दुर्गा वाहिनी शुभांजलि ग्रुप की बहनों ने ‘खड्ग नृत्य’ प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता राधेश्याम अमेरिया ने की। दुर्गा वाहिनी विभाग संयोजिका लोपामुद्रा जोशी ने समरसता विषय पर सुमधुर ‘काव्य गीत’ प्रस्तुत किया।

अंत में योगेश दशोरा ने समरसता मंत्र’ का वाचन किया। संगोष्ठी के पश्चात ऑडिटोरियम परिसर में ही सामूहिक ‘भोज-प्रसाद’ का आयोजन हुआ, जहाँ सभी वर्गों के लोगों ने एक साथ बैठकर भोजन ग्रहण किया।

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