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शिक्षा देश की संस्कृति एवं परंपराओं के अनुरूप होनी चाहिए – देशराज शर्मा

शिक्षा देश की संस्कृति एवं परंपराओं के अनुरूप होनी चाहिए – देशराज शर्माविद्या भारती संस्थान के राष्ट्र निर्माण के नवीन शैक्षिक संकल्प

नई दिल्ली, 31 मार्च।

महाशय चुन्नीलाल सरस्वती बाल मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, हरि नगर में आयोजित “अखिल भारतीय पत्रकार वार्ता 2026” में संस्थान ने देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था, अपने शैक्षिक कार्यों, वर्षभर की उपलब्धियों एवं आगामी लक्ष्यों पर जानकारी साझा की। पत्रकार वार्ता का उद्देश्य नवीन शैक्षिक संकल्पों एवं कार्यक्रमों की जानकारी देने के साथ-साथ, वर्षभर में किए गए शैक्षिक, सामाजिक एवं संगठनात्मक कार्यों को समाज एवं मीडिया के समक्ष प्रस्तुत करना रहा।

अखिल भारतीय महामंत्री देशराज शर्मा ने कहा कि शिक्षा देश की संस्कृति एवं परंपराओं के अनुरूप होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थी अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए राष्ट्र निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकें। विद्या भारती का ध्येय राष्ट्र की भावी पीढ़ी को सांस्कृतिक आधार से जोड़ते हुए उन्हें वैश्विक चुनौतियों के लिए सक्षम बनाना है।

उन्होंने बताया कि विद्या भारती वर्तमान में देशभर में लगभग 24,000 औपचारिक एवं अनौपचारिक विद्यालयों के माध्यम से संस्कारनिष्ठ एवं समग्र शिक्षा प्रदान कर रही है, जिससे यह एक प्रमुख गैर-सरकारी शिक्षा संस्थान बन चुका है। संस्थान 11 क्षेत्रीय कार्यालयों, 46 प्रांतीय समितियों तथा 684 जिलों में सक्रिय उपस्थिति के माध्यम से व्यापक स्तर पर कार्य कर रहा है।

विद्या भारती के विद्यालयों में लगभग 33 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं तथा 1.5 लाख से अधिक आचार्य/शिक्षक सेवा प्रदान कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, सेवा क्षेत्र के अंतर्गत हजारों संस्कार केन्द्रों के माध्यम से 2.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों तक निःशुल्क एवं आधारभूत (बुनियादी) शिक्षा पहुँचाई जा रही है।

संस्थान समाज के सहयोग से अपने संस्कार केन्द्रों के माध्यम से अति पिछड़े वर्ग तक शिक्षा का प्रकाश पहुँचा रहा है। साथ ही ग्रामीण, वनवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में एकल विद्यालयों के माध्यम से शिक्षा के साथ सामाजिक जागरूकता का प्रसार कर स्थानीय समुदाय को सशक्त बनाया जा रहा है।

विद्या भारती की शिक्षा पद्धति में शारीरिक शिक्षा, योग, संगीत, संस्कृत, नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा के साथ-साथ मातृभाषा में शिक्षा तथा पंचपदी शिक्षण पद्धति के माध्यम से विद्यार्थियों के समग्र एवं संतुलित विकास पर विशेष बल दिया जाता है।

विज्ञान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने हेतु देशभर के 507 विद्यालयों में अटल टिंकरिंग लैब (ATL) स्थापित की गई हैं, जिससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं नवाचार की भावना विकसित हो रही है।

नई शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन तथा भारतीय संस्कृति आधारित आधुनिक शिक्षा पद्धति के विकास हेतु निरंतर कार्य कर रहा है। इस क्रम में विषय विशेषज्ञों को प्रशिक्षित कर विद्यालय स्तर तक प्रशिक्षण पहुँचाया जा रहा है, जिससे भारत-केंद्रित शिक्षा का स्वरूप जमीनी स्तर तक प्रभावी रूप से लागू हो सके।

उन्होंने बताया कि 3 अप्रैल से 6 अप्रैल 2026 तक हरिनगर स्थित विद्यालय परिसर में वार्षिक साधारण सभा (AGM) का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभर से लगभग 350 प्रतिनिधि सहभागी होंगे। सभा में आगामी शैक्षणिक योजनाओं, नीतियों एवं संगठनात्मक विषयों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।

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